अदिति और नैनीताल

Highcourt Road पर 5 किलोमीटर चलने के बाद नैनीताल व्यू प्वाइंट आता है |
आम के आकार की झील और पहाड़ों से घिरे नैनीताल को देखना आंखों को बहुत सुकून देता है |
बर्फ से ढकी सड़कें, बादलों से घिरे हुए पहाड़, ठंडी चलती हवाएं, पक्षियों का शोर और झील का शांत स्वभाव किसी को भी अपनी ओर आकर्षित कर सकता है |


नैनीताल अपने आप में बहुत सारे रंग समेटे हुए है, ऐसा लगता है किसी ने सफेद कागज पर रंग-बिरंगे रंगों की बौछार कर दी हो |
यहां पर 200 मीटर के दायरे में मंदिर,  गुरुद्वारा,चर्च और मस्जिद स्थित है ,
रंग-बिरंगे कपड़े पहने भोटिया जनजाति के लोग, पहाड़ी टोपी पहने कुमाऊनी लोग, कुछ स्थानीय लोग और दूर-दूर से आए हुए सैलानी मिलते हैं जिनको नैनी झील आपस में बांध कर रखती है |


झील के किनारे खड़े होकर मेरी नजर ठंडी सड़क वाली गली  की ओर जाती है और नजर आता है 12 साल का एक बच्चा, साथ में उसकी मां है जो कि उसे उसकी शरारत के लिए डांटते हुए घर लेकर जा रही है, आंखों के सामने यह नजारा ऐसे चल रहा है जैसे कि कल की ही बात हो और अचानक से समय की सुई रुक जाती है|

और याद आता है 12 साल का एक लड़का  जो Mall रोड से बस पकडकर स्कूल जाता है उसके लिए दुनिया अभी सिर्फ नैनीताल की वादियों तक ही सिमित है |
स्वाभाव से बहुत ज्यादा चंचल है, शैतानी करने में सबसे आगे है,
रोज़ किसी न किसी शैतानी की शिकायत उसके घर वालों को सुनने को मिलती हैं  |
एक दिन स्कूल से फ़ोन आया कि आज फिर सार्थक ने  शैतानी करके खुद को चोट लगा ली है | सिर पर गहरी चोट आने  की वजह  से 2 stiches लगाने  पड़ते हैं | बीतते समय  के साथ उसकी शरारत बढ़ती जाती हैं सभी की उसके  बारे  में एक ही  राय  होती है "पता नहीं इसका future क्या होगा"


सार्थक- समय का कांटा अपने साथ सभी कुछ बदल देता है, समय के साथ अब मेरे parents ज्यादा परेशान नहींं रहते थे, क्योंकि मेरी शरारतें हैं अब कम हो चुकी थी और मैंने अपनी पढ़ाई और acadamics पर ध्यान देना शुरू कर दिया था |



सभी साथी दोस्त उन दिनों tution जाया करते थे, मुझे ट्यूशन जाने की जरूरत महसूस नहीं हुई, साथी दोस्त ट्यूशन में होने वाली सभी हंसी मज़ाक की  बातें बताते थे |

जिसको सुनकर मुझे बहुत इंटरेस्ट आने लगा, और मैंने decide किया कि मैं भी ट्यूशन जाऊंगा |

मेरे parents को भी इस बात से कोई परेशानी नहीं हुई वह तो और भी ज्यादा खुश थे कि मैं अपने acadamics को लेकर serious हूं |

ट्यूशन का दूसरा दिन था एक हल्की सी आवाज़ आयी May I come in sir! आवाज़ काफ़ी हल्की और मधुर थी |

Yes please ट्यूशन teacher ने कहा, और हम सभी को बताया कि यह अदिति है और हमारे बैच के साथ इंग्लिश ट्यूशन पड़ेगी | इंग्लिश पढ़ने वाली वो अकेली स्टूडेंट थी इसलिए ट्यूशन teacher हमारे बैच के time उसे भी adjust कर लिया था |

सुनने में आया कि अदिति St. Mary's Convent High School, Nainital में पढ़ती है जो कि Naini Public School स्कूल से 3 km दूर था |

अब रोज़ ट्यूशन जाना, थोड़ी पढ़ाई थोड़ा मस्ती करना होता था, ऐसा करते करते कुछ दिन बीत चले थे |

सब कुछ ठीक चल रहा था कि एक दिन अदिति ट्यूशन नहीं आयी | उस दिन बाकी सभी कुछ normal था लेकिन फिर भी कुछ तो अधूरा अधूरा लग रहा था

St. Mary मे पढ़ने वाली friend गरिमा से पूछने पर पता चला कि अदिति अपनी family के साथ marriage function में रानीखेत चली गई है |

सुन कर थोड़ा अच्छा लगा लेकिन साथ ही मन में एक ख्याल आया " कि मैं अदिति के ट्यूशन ना आने से इतना परेशान क्यों हूँ " | शायद अदिति मुझे अच्छी लगने लगी है, जब भी उसका ख्याल आता है तो आस पास का माहौल अच्छा लगने लगता है, यही reason था कि उसके ना होने से खराब लग रहा था |

एक ही ख्याल जो कि बार बार मन में आ रहा था कि जैसे ही अदिति रानीखेत से वापस आएगी मैं उसे बता दूंगा कि वो मुझे कितनी अच्छी लगती है | उन दिनों की बात ही अलग थी सब कुछ बहुत अच्छा लगने लगा था, नैनीताल के पहाड़ और भी ज्यादा सुन्दर लगने लगे थे, झील की आवाज़ महसूस होने लगी थी वो गलियां और भी ज्यादा रंगीन लगने लगी थी | 

आखिर वो दिन भी आ गया जब अदिति वापस आई, मेरे लिए ये दिन काफ़ी special था पिछले कुछ दिनों में बहुत हिम्मत जोड़ ली थी |
ट्यूशन खत्म होने के बाद मंदिर जाने के बहाने उसके पीछे चला गया और उसने notice कर लिया लेकिन उसके आगे बात करने की मेरी बिलकुल भी हिम्मत नहीं हुई | 

अगले दिन ट्यूशन में अदिति को देखा वो वो नज़रें झुकाये बैठी थी, मेरी तरफ देख कर हल्के सी मुस्कुराहट के साथ उसने देखा और जैसे तैसे करके मैं भी उसकी ऑंखें देख पाया |

ट्यूशन खत्म हुआ और अदिति जल्दी जल्दी में निकल गई, मैंनें भी नोट्स बंद किये और जल्दी से बाहर निकल गया | दूर दूर तक नज़र घुमाई फिर भी अदिति कहीं दिखाई नहीं दी | मैं थोड़ा सा परेशान हुआ, तभी पीछे से आवाज़ आयी "Hello Mr. किसे ढूंढ रहे हो", अदिति जानबूझकर पीछे गली में छिप गई थी, जुबान लड़खड़ाते हुए मैंने कहा "वो मुझे मंदिर जाना था, आपका घर भी पास में है तो साथ चलते हैं" अदिति नें हँसते हुए ठीक है कहा | 

आज भी कुछ बोलने की हिम्मत नहीं हुई, मंदिर मे उसके नाम का माथा टेककर ही वापस आ गया | एक बात की खुशी थी कि अदिति ने Notice कर लिया है |

अदिति रोज़ ट्यूशन आती थी और मुझे देखकर हल्का हंसती रहती थी, और मुझे भी अदिति को देखकर बहुत ही पॉजिटिव Vibes आती थी |

नवंबर का आखिरी हफ्ता था नैनीताल में शरदोत्सव (Winter festival) था, बर्फ पड़नी शुरू हो गई थी, शरद उत्सव ने नैनीताल को रंग बिरंगा बना दिया था |

गरिमा से पता चला की अदिति शरद उत्सव में होने वाली डोली यात्रा में जाने वाली है तो मैंने भी जाने का मन बना लिया और गरिमा के पास message भेजा कि मैं अदिति से बात करना चाहता हूँ | शरद उत्सव की शाम शाम थी ठण्ड बहुत ज्यादा बढ़ चुकी थी, हल्के हवाएं चल रही थी,कल का इंतज़ार करना मुश्किल था कि अचानक मुझे फ़ोन आया " मैं अदिति बात कर रही हूँ मुझे आपसे बात करनी है कल डोली यात्रा शुरू होने से पहले मुझे Endcliff रोड पर मिलना" |

डोली यात्रा सुबह जल्दी निकलती है इसलिए मैं 6 बजे ही पहुँच गया, थोड़ी देर बाद मेरी नज़र एक ओर खिंचती चली गई, सामने से रंगीन पहाड़ी लिबास मे अदिति एका एक मेरी तरफ आ रही थी | मानो सारा नैनीताल ही उससे आने वाली रौशनी से ही जगमगा उठा है जैसे कि ऊषा की रौशनी का वही एक श्रोत है |

अदिति और  मेरे बीच मे सिर्फ 100 मीटर का फासला था लेकिन डोली यात्रा में बहुत भीड़ थी, 100 मीटर के फासले मे ही लगभग 50 लोग ओर खड़े थे, मैंने देखा वो मेरी तरफ देख रही है मगर उसके चेहरे पर हल्की सी सिकन है जैसे वो कह रही हो कि वो मुझसे अभी बात करना चाहती है |

मैं डोली यात्रा मे सबसे आगे था इसलिए मुझे डोली उठाने का मौका मिला, मैं बहुत ख़ुश था कि अदिति साथ है, भीड़ बहुत ज्यादा थी मैंने सोच लिया था नैनी पीक पर पहुंचने के बाद सबसे पहले अदिति से मिलूंगा |

डोली चलना शुरू हुई मैंने मुड़कर अदिति को देखा तो इस बार मुझे भी अजीब लगा उसके ऑंखें अभी भी परेशान थी, जैसे कि मुझे कुछ बताना चाहती हों, मैं डोली उठा चुका था जिसे मैं छोड़ नहीं सकता था | पीछे मुड़कर देखा तो अदिति भीड़ में कहीं खो चुकी थी, मैं थोड़ा परेशान हुआ, अपने मन को थोड़ा सब्र करने के लिए कहा |

अब इंतज़ार था तो सिर्फ नैनी पीक पर पहुंचने का,रास्ते में बहुत ख्याल आते रहे और मन में खुशी भी थी | डोली यात्रा के रास्ते बहुत ज्यादा तंग थे लेकिन आज ये तंग रास्ते भी मुझे परेशान नहीं कर रहे थे पूरे रास्ते मेरी निगाहें अदिति को ही ढूंढ रही थी परन्तु अदिति को देख पाना मुश्किल था |

4 घंटे के लम्बे सफर के बाद हम अपनी मंजिल पहुंचे लेकिन मेरी मंज़िल अभी अधूरी थी, मेरी आंखे बेसब्री से अदिति को ढूंढ़ने लगी, सभी लोगों नें पूजा शुरू कर दी | मैं भीड़ में अदिति को ढूंढ रहा था लेकिन अदिति को ढूंढ पाना मुश्किल हो रहा था अब तो सब्र का बांध टूट रहा था, आस पास की सभी जगह देखा, अदिति का कुछ भी पता नहीं चल रहा था, मैं और भी ज्यादा परेशान हो रहा था |

मैंने अदिति को बहुत ढूँढा लेकिन वो नहीं मिली, मैं परेशान होकर वापस आने लगा, मै जल्दी से जल्दी नैनीताल पहुंचना चाहता था और अदिति से मिलकर बात करना चाहता था, पूरे रास्ते  अदिति कहां है और कैसी है? ऐसे ख्याल मन में आ रहे थे | 

मैं सीधे गरिमा से मिलने चला गया और उस से पूछा अदिति कहां है और सब ठीक है ना???

गरिमा नें मुझे letter दिया और कहा पढ़ लो!

कुछ देर ख्यालों में खोये रहने के बाद मुझे अहसास हुआ कि ये तो बिता हुआ कल है समय बीतते-बीतते आज 10 साल हो चले हैं। मानो समय एक आंधी की तरह आया और हम सभी उसमे बहते चले गये ।

12 साल का वह बच्चा मेरी तरफ देखता है और मुस्कुराते हुए सामने से गुजर जाता है, मेरे चहरे पर भी उसको देखे कर खुशी आ जाती है । 


Stay tuned





























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